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खेटाबरी, कुशलगढ़ के वंश कलाल की अनोखी पहल ‘साइबर मित्र’ ने ग्रामीण भारत को दी साइबर सुरक्षा की नई दिशा — अब तक 120+ मामलों में पीड़ितों को मिली मदद

खेटाबरी, कुशलगढ़ के वंश कलाल की अनोखी पहल ‘साइबर मित्र’ ने ग्रामीण भारत को दी साइबर सुरक्षा की नई दिशा — अब तक 120+ मामलों में पीड़ितों को मिली मदद

खेटाबरी, कुशलगढ़, बांसवाड़ा | जून 2025 —राजस्थान के आदिवासी क्षेत्र में बसे खेटाबरी गांव के 17 वर्षीय वंश कलाल ने यह सिद्ध कर दिया कि परिवर्तन लाने के लिए न तो बड़ी उम्र चाहिए, न ही कोई ऊँचा मंच — सिर्फ एक दृढ़ संकल्प और सच्ची भावना काफी है।

आज जब देश डिजिटल हो रहा है, तब डिजिटल ठगी भी तेज़ी से बढ़ रही है — और सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं वे लोग जो तकनीकी भाषा और प्रक्रिया से अनजान हैं। इन्हीं लोगों की मदद के लिए वंश ने तैयार किया है ‘साइबर मित्र’ — एक मुफ्त, हिंदी भाषा आधारित डिजिटल चैटबॉट, जो अब तक 120 से भी अधिक साइबर पीड़ितों की मदद कर चुका है।

? शुरुआत एक दर्द से हुई

वंश की कहानी किसी बड़े शहर की लैब से नहीं, बल्कि राजस्थान के दक्षिणी सिरे पर बसे उनके छोटे-से गांव खेटाबरी से शुरू होती है। यहां इंटरनेट और स्मार्टफोन तो पहुंच गए, पर सुरक्षा और जानकारी की रोशनी नहीं पहुंची।

“मैंने अपने गांव में कई लोगों को ATM, UPI, और लिंक भेजकर हुई धोखाधड़ी में हजारों रुपए गँवाते देखा। वे चुप थे, डरते थे। उन्हें नहीं पता था कि कहां जाएं, कैसे शिकायत करें। मैं ये चुप्पी तोड़ना चाहता था।” — वंश कलाल

यही से ‘साइबर मित्र’ का बीज पड़ा — एक ऐसा साथी, जो हर ग्रामीण को भाषा, प्रक्रिया और अधिकारों के स्तर पर सशक्त बनाए।

? शैक्षणिक पृष्ठभूमि और आत्मनिर्भरता का संगम

वंश ने अपनी पढ़ाई ABC स्कूल, डूंगरा छोटा से की और हाल ही में 12वीं बोर्ड परीक्षा 71% अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। वे बताते हैं कि वे कभी कक्षा के टॉपर नहीं रहे — पर उन्हें सीखने और समाधान खोजने की भूख हमेशा रही।

बिना किसी तकनीकी डिग्री या कोडिंग संस्थान के, वंश ने स्व-अध्ययन, YouTube, फोरम्स और ओपन-सोर्स संसाधनों की मदद से ‘साइबर मित्र’ का निर्माण किया।

“पढ़ाई में मैं एवरेज था, लेकिन जिंदगी को समझने में मैं रुका नहीं। जब समझ आया कि टेक्नोलॉजी से लोगों की मदद हो सकती है — तब मेरी असली पढ़ाई शुरू हुई।”

? ‘साइबर मित्र’ कैसे करता है मदद?

‘साइबर मित्र’ एक यूजर-फ्रेंडली डिजिटल चैटबॉट है, जो खासकर ग्रामीण और सामान्य नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूक करने और उसे होने के बाद के स्टेप्स समझाने में मदद करता है।

इसमें शामिल हैं:

  • साइबर ठगी की पहचान करने के टिप्स
  • घटना के बाद क्या करें — तुरंत गाइडेंस
  • सरकारी पोर्टल पर शिकायत कैसे दर्ज करें, पूरा मार्गदर्शन
  • डिजिटल सबूत कैसे संकलित करें
  • ऑनलाइन सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी

यह चैटबॉट WhatsApp पर काम करता है, और इसे कोई भी कम पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी आसानी से इस्तेमाल कर सकता है।

? 120 से अधिक साइबर मामलों में प्रत्यक्ष सहायता

अब तक वंश ने 120+ साइबर क्राइम पीड़ितों की मदद की है — जिनमें से कई मामलों में पीड़ितों को अपना पैसा वापस मिला, और कई को कानूनी कार्रवाई के लिए सही रास्ता मिला।

इस प्रक्रिया में उन्होंने स्थानीय प्रशासन व साइबर विभागों से तालमेल बना कर काम किया, ताकि अधिक से अधिक लोग सही समय पर सहायता पा सकें।

“मैं किसी के पैसे नहीं लौटा सकता, लेकिन मैं उन्हें इतना सशक्त बना सकता हूँ कि वे खुद अपना हक मांग सकें। मेरा काम है रास्ता दिखाना।”

? प्रायोजन ठुकराया, सेवा चुनी

जब ‘साइबर मित्र’ लोगों के बीच चर्चा का विषय बनने लगा, तो कई निजी कंपनियों व प्लेटफ़ॉर्म्स से निवेश और खरीद के प्रस्ताव आए। कुछ ने इसे ‘स्टार्टअप’ बना कर मार्केट में उतारने का सुझाव भी दिया।

लेकिन वंश ने सभी ऑफर ठुकरा दिए।

“मैंने ये सिस्टम पैसे के लिए नहीं बनाया, ये मेरी जिम्मेदारी है। अगर मैं इसे बेच दूँ, तो उस भरोसे का क्या जो गांव के लोगों ने मुझ पर रखा?”

? अगला लक्ष्य: हर पंचायत में साइबर मित्र

वंश अब चाहते हैं कि आने वाले समय में हर गांव, हर स्कूल, और हर पंचायत स्तर पर साइबर मित्र तक लोगों की पहुंच हो। वे इसके लिए NGOs, सामाजिक संस्थानों और सरकारी अभियानों से जुड़ने की योजना बना रहे हैं।

उनका सपना है कि डिजिटल सुरक्षा हर नागरिक का मौलिक अधिकार बने, चाहे वह शहर में रहता हो या किसी पहाड़ी गांव में।

? संघर्ष और सीख — एक संदेश युवाओं के लिए

वंश का जीवन कोई सीधी रेखा नहीं थी — ग्रामीण क्षेत्र, सीमित सुविधाएं, कम exposure, और तकनीकी ज्ञान का प्रारंभिक अभाव। फिर भी उन्होंने खुद को साबित किया।

“मैं आज भी बड़ा नहीं हूँ, पर मैं फर्क लाने की कोशिश कर रहा हूँ — और वही सबसे बड़ा कदम है। मैं चाहता हूँ कि हर युवा अपने गांव में कुछ ऐसा करे, जो बदलाव लाए।”

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